*मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय*

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Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath along with yog guru Baba Ramdev and Yogi Bharat Bhushan at Uttar Pradesh Yog Mahotsav Progrramme in Lucknow on wednesday. Yogi attend first public function being a Chief Minister.Express photo by Vishal Srivastav 29.03.2017

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज यहां लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

*शासकीय विभागों में ई-टेंडरिंग तथा ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू किये जाने का फैसला*

मंत्रिपरिषद ने शासकीय विभागों में ई-टेंडरिंग तथा ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू किये जाने का फैसला लिया है। यह निर्णय वर्तमान सरकार के लोक-कल्याण संकल्प पत्र 2017 के ‘सभी सरकारी काॅन्ट्रैक्ट के लिए ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू की जायेगी‘ के वायदे के अनुरूप लिया गया है।

 इस निर्णय के तहत प्रदेश के सभी शासकीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों, स्वायत्त शासी संस्थाओं, निकायों इत्यादि में एन.आई.सी. के ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफार्म का प्रयोग करते हुये सभी निर्माण कार्यो, सेवाओं, जाॅब वर्क, सामग्री क्रय के लिए ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली को लागू किया जाएगा। निर्माण कार्यो, सेवाओं, जाॅब वर्क, सामग्री क्रय के लिए निविदा प्रक्रिया मैनुअल विधि से संपादित की जाती है, उन निविदाओं को ई-प्रोक्योरमेंट एवं ई-टेंडरिंग के माध्यम से कराया जाना प्रत्येक विभाग के लिए अनिवार्य होगा।

 संबंधित विभागों, उपक्रमों इत्यादि द्वारा ई-टेंडरिंग तथा ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू करने हेतु आवश्यक हार्डवेयर, प्रशिक्षण, साॅफ्टवेयर कस्टमाईजेशन, डिजिटल सिग्नेचर आदि व्यवस्थायंे तीन माह में पूर्ण करायी जायेगी। निविदा शुल्क (टेण्डर फीस) के भुगतान तथा धरोहर राशि (ई.एम.डी) के भुगतान एवं वापसी की प्रक्रिया भी भौतिक प्रारूप में न करके आॅनलाइन व्यवस्था के माध्यम से की जायेगी।

ई-प्रोक्योरमेंट एवं ई-टेंडरिंग प्रणाली के अन्तर्गत विभिन्न कार्यवाहियां जैसे ई-रजिस्ट्रेशन, ई-कोडिंग, टेण्डर क्रियेशन, टेण्डर प्रकाशन, टेण्डर परचेज, सबमिशन, बिड-ओपनिंग आदि समस्त कार्य इलेक्ट्रानिक माध्यम से किये जायेंगे। सर्वाधिक प्रतिस्पर्धात्मक दरें प्राप्त करने के लिए अलग-अलग ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफार्म का प्रयोग करने के स्थान पर सभी विभागों द्वारा एन.आई.सी. द्वारा विकसित ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफार्म पर ई-प्रोक्योरमेंट किया जायेगा।

ई-प्रोक्योरमेंट के  बिड्स एवं डाटा की गोपनीयता, सुरक्षा तथा अनुरक्षण का दायित्व एन.आई.सी. का होगा। ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में नियमों एवं प्रक्रियाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है, अपितु वर्तमान नियमों एवं प्रक्रियाओं के अन्तर्गत ही केवल इलेक्ट्रानिक मीडिया का उपयोग करते हुए टेण्डरिंग की कार्यवाही की जायेगी। स्टोर-परचेज रूल्स, टेण्डर रूल्स एवं तत्सम्बंधी अन्य नियम उक्त श्रेणियों की ई-टेंडरिंग में यथावत् लागू रहेंगे एवं इनमें, प्रचलित पेपर ट्राजेक्शन के स्थान पर मात्र इलेक्ट्रानिक माध्यम का प्रयोग करते हुए ई-टेंडरिंग/ई-प्रोक्योरमेंट की जायेगी।

आईटी एवं इलेक्ट्रानिक विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अधीनस्थ यूपी इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन लिमिटेड, पूर्ववत् प्रदेश में ई-टेंडरिंग/ई-प्रोक्योरमेंट लागू करने हेतु नोडल एजेन्सी होगी तथा ई-टेंडरिंग करने वाले विभागों/उपक्रमों इत्यादि को एन.आई.सी. लखनऊ तथा यूपीएलसी द्वारा आवश्यकतानुसार हैण्डहोल्डिंग सहायता प्रदान की जायेगी। ई-प्रोक्योरमेंट/ई-टंेडरिंग में प्रतिभाग करने वाले ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों एवं टेण्डर समिति के सदस्यों को डिजिटल सिग्नेचर प्राप्त करने होंगे। ये डिजिटल सिग्नेचर भारत सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी संस्था से लिये जा सकते हंै।

मंत्रिपरिषद द्वारा इस संबध में अन्य निर्णय लिए जाने हेतु मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है।

ज्ञातव्य है कि इस व्यवस्था के लागू होने से टेण्डर एवं ठेकेदारी प्रक्रिया में माफिया राज समाप्त होगा तथा कोई भी व्यक्ति कहीं से भी भयमुक्त होकर निविदा प्रक्रिया में आवेदन कर सकेगा। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से विभागों को वस्तुओं एवं सेवाओं के क्रय के लिए न्यूनतम तथा विक्रय के लिए अधिकतम दरें प्राप्त होंगी। इससे इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने से अधिकारियों पर से अवांछित दबाव समाप्त होगा। मैनुअल टेण्डर के तहत इनडेंट के प्रारम्भ से लेकर तुलनात्मक परिक्षण तक लगने वाले तीन माह के समय में कमी आयेगी तथा यह प्रक्रिया एक माह में पूरी हो सकेगी। टेण्डर प्रक्रिया के असफल प्रतिभागियों को स्वतः सूचना उनके ई-मेल पर मिल जायेगी। टेण्डर से संबंधित सभी प्रत्रावलियां ई-टेण्डर डाटा बेस पर सुरक्षित रहती है। इससे पांच-दस वर्षो के बाद भी टेण्डर से संबंधित किसी अभिलेख को देखा जा सकेगा।

*गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट कोे पुनर्जीवित करने के लिए हिन्दुस्तान उवर्रक एवं रसायन लिमिटेड को भूमि के अन्तरण हेतु स्टाम्प शुल्क में छूट के प्रस्ताव को मंजूरी*

मंत्रिपरिषद ने गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट कोे पुनर्जीवित करने के लिए फर्टिलाइजर कारपोरेशन आॅफ इण्डिया लिमिटेड (एफ.सी.आई.एल.) से हिन्दुस्तान उवर्रक एवं रसायन लिमिटेड को भूमि के अन्तरण के लीज विलेख हेतु अनुमानित स्टाम्प शुल्क 210 करोड़ रूपये की छूट के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

ज्ञातव्य है कि हिन्दुस्तान उवर्रक और रसायन लिमिटेड, एनटीपीसी, कोल इंडिया लिमिटेड तथा इंडियन आॅयल कारपोरेशन का संयुक्त उपक्रम है। भारत सरकार द्वारा दिनांक 13 जुलाई, 2016 को इस संयुक्त उपक्रम के द्वारा गोरखपुर स्थित उवर्रक प्लांट को पुनर्जीवित किये जाने का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया है।

इस उवर्रक प्लांट को पुनर्जीवित करने के लिए 6500 करोड़ रूपये का निवेश होना प्रस्तावित है। इस निवेश से सम्पूर्ण क्षेत्र में आर्थिक विकास और अतिरिक्त निवेश होगा। उवर्रक प्लांट के पुनर्जीवित होने से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा। जिससे क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को विकास के अवसर प्राप्त होंगे। प्लांट के उत्पादन आरम्भ करने से उवर्रक आपूर्ति में सुगमता आयेगी जो इस क्षेत्र के किसानों के लिये लाभदायक सिद्ध होगी। उवर्रक उत्पादन से आपूर्ति में वृद्वि होने से देश में उवर्रक आयात में कमी आयेगी और विदेशी मुद्रा भण्डार की बचत होगी।

इस उवर्रक प्लांट की स्थापना फर्टिलाइजर कारपोरेशन आॅफ इण्डिया लिमिटेड (एफ.सी.आई.एल.) की विद्यमान भूमि के 630 एकड़ पर की जानी है। जिसका चिन्हांकन कर लिया गया है। यह भूमि फर्टिलाइजर कारपोरेशन आॅफ इण्डिया लिमिटेड से हिन्दुस्तान उवर्रक और रसायन लिमिटेड को 55 वर्ष की अवधि के लिए लीज पर दी जानी है।

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