उर्जावर्धक स्त्रोत मानव का जीवन भी एक अजब की कहानी है जिसका रहस्य जानना जरूरी है

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हमारे उर्जावर्धक स्त्रोत मानव का जीवन भी एक अजब की कहानी है जिसका रहस्य जानना जरूरी है। समय-समय पर अनेको बुद्धिजीवी हुए और उन्होंने अपने-अपने विचार व्यक्त किये तथा दुनिया को रास्ता दिखने की कोशिश की। इसी में सकारात्मक ऊर्जा भी एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। जीवन एक उर्जाओ का पुंज है तथा इस जीवनरूपी यात्रा का मार्ग कठिन है लेकिन इसमें अनेको उर्जावर्धक स्त्रोत है जिनसे जीवन की कठिनाइयों को पर करने में मदद मिलती है। यंत्र-मन्त्र-नगीने ये उस तरह से काम करते है जैसे बीमार होने पर दवाईया काम करती है, इसी तरह से उपयुक्त मेथड काम में लेने से संबधित समस्या के हल में मदद मिलती है। ब्रह्माण्ड के अपने नियम है और इंसान उस तक पहुचने में सक्षम नही है क्योकि ब्रह्माण्ड की विज्ञानं हमारी विज्ञानं से बहुत आगे है। इसके रहस्यों को जानना इंसान के बस की बात नही होती है। जीवन में अनेको तरह के अनुभव हम लेते है , इसके साथ ही हम खुद अपनी मुसीबत के समय उन अनुभवों का प्रयोग नही करते है। काश इसको समझकर इंसान सही समय पर सही कदम उठाये तो वह कभी भी समस्याओ में फसेगा नही जबकि उनको एक एक कर पार करता जायेगा। जीवन एक वो यात्रा है जहा पर समय-समय पर कठिनाइयों से इंसान घिर जाता है , एक के बाद एक कठिनाई आना स्वभाविक है लेकिन उसको पर करना इंसान का धर्म है और उसी को सफलता कहते है। कठिनाइया कभी खत्म नही होती है जबकि एक के बाद एक सिलसिलेवार आती है , इसी का नाम जीवन है क्योकि कठिनाइया जीवन का मूलाधार है , कठिनाइया नही तो जीवन नही। इसमें ९ ग्रहो का जो चक्र है उसकी उर्जाओ से ही कठिनाइया आती है इर उनका हल होता है, यही कारण है की हम जो सोचते है वो होता नही है। 99.99%लोगो का सपना खुशिया प्राप्त करना होता है लेकिन दुर्भाग्य से वो ख़ुशी का मतलब नही समझ पाते है , असली ख़ुशी वो है जिसमे बड़ी से बड़ी समस्या को हल कर अपने-आप को अगली चुनौती हेतु तैयार करना। जरा सा भी अगर आप पीछे मुड़ कर देखेगे तो पाएंगे की समस्यरहित किसी का भी जीवन न था और न ही होगा जबकि हकीकत तो ये है की जो जितनी समस्याए देखता है उतनी ही तरक्की करता है तथा मेरी नज़र में समय-समय पर आने वाली समस्याओ का सामना करने हेतु आप नगीनों, यंत्र या फिर मंत्रो का सहारा भी ले सकते है लेकिन वो सब आपकी ऊर्जा स्तर के अनुकूल हो। पूजा-पाठ करना या प्रार्थना करना गलत नही लेकिन उसको करके आत्म-मंथन करना भी जरूरी है।

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